धतूरा एक कांटेदार फल होता है इसके फूल लंबे होते हैं पत्तियां फैली हुई होती हैं इसके फल गोल- बॉल की तरह होते हैं इसके बीज बहुत ही ज्यादा जहरीले होते हैं इसके अधिक सेवन करने से इंसान पागल हो जाता है। जिस किसी व्यक्ति को लकवा मार गया हो उस व्यक्ति के लिए यह एक रामबाण औषधि है धतूरे के बीजों को सरसों के तेल में मिलाकर मध्यम आंच पर पका लीजिए इसमें तिल और नीम की पत्ती मिलाकर एक मिश्रण बना लें इस मिश्रण को बारीक करके जिस जगह पर लकवा मार गया हो उस स्थान पर रोजाना मालिश करें इसकी रोजाना मालिश करने से लकवा जैसी घातक बीमारी दो दिन में ठीक हो जाती है।
धतूरे का प्रयोग गंजेपन को दूर करने के लिए भी किया जाता है। इसके रस को सिर पर मलने से न केवल डैंड्रफ ख़त्म होती है, बल्कि गंजेपन से भी छुटकारा मिलता है। दर्द से रहत पाने के लिए धतूरे के रस को टिल के तेल में मिलकर गर्म कर लें और दर्द वाली जगह पर इस तेल की मालिश करें। बवासीर के इलाज के तौर पर भी धतूरे का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए धतूरा के फूल और पत्तों को जलाकर इसके धुएं से बवासीर के मस्सों की सिकाई करने से भी फायदा होता है। नियमित रूप से धतूरे के रस और तिल के तेल की मालिश करने से जोड़ों की समस्या और गठिया जैसी समस्याओं से न केवल काफी हद तक निजात पाई जा सकती है बल्कि इस रोग को पूरी तरह से मिटाया भी जा सकता है।
धतूरे का प्रयोग गंजेपन को दूर करने के लिए भी किया जाता है। इसके रस को सिर पर मलने से न केवल डैंड्रफ ख़त्म होती है, बल्कि गंजेपन से भी छुटकारा मिलता है। दर्द से रहत पाने के लिए धतूरे के रस को टिल के तेल में मिलकर गर्म कर लें और दर्द वाली जगह पर इस तेल की मालिश करें। बवासीर के इलाज के तौर पर भी धतूरे का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए धतूरा के फूल और पत्तों को जलाकर इसके धुएं से बवासीर के मस्सों की सिकाई करने से भी फायदा होता है। नियमित रूप से धतूरे के रस और तिल के तेल की मालिश करने से जोड़ों की समस्या और गठिया जैसी समस्याओं से न केवल काफी हद तक निजात पाई जा सकती है बल्कि इस रोग को पूरी तरह से मिटाया भी जा सकता है।
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